Sunday, 14 October 2018

*जैन धर्म तीर्थ यात्रा* 🚌

यात्रा क्रमांक 1⃣
दिनांक-१४-१०-१८

*श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र महलका*

श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र महलका पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हस्तिनापुर से मात्र 30 किमी पर स्थित हैं । भगवान चन्द्रप्रभु की अतिशयकारी अति प्राचीन भूगर्भ से प्राप्त प्रतिमा यहां विराजमान है ।

सन 1957-58 में सरधना में नहर की खुदाई के दौरान प्राप्त प्रतिमा को जब जैन श्रद्धालुओं द्वारा हस्तिनापुर लाया जा रहा था, तो रात्रि विश्राम के लिए उन्हें महलका नामक गाँव मे रुकना पड़ा, यहां प्राचीन श्री पार्श्वनाथ भगवान का चैत्यालय था । रात्रि विश्राम के बाद जब सुबह सब लोग चलने लगे तो बैलगाड़ी टस-से-मस न हुई, इस प्रयास में पूरा दिन निकल गया, लेकिन सफलता नही मिली । अतः फिर रात्रि वही विश्राम करना पड़ा ।

रात्रि में दल के एक सदस्य को स्वप्न आया कि इस प्रतिमा को यही प्रतिष्टित करा दिया जाए । तब मूर्ति को महलका में ही स्थापित करने का निर्णय लिया गया । तत्पश्चात सन 1971 मे भव्य पंचकल्याणक सम्पन्न कराए गए ।

*कैसे पहुंचे* - श्री 1008 चन्द्रप्रभु अतिशय क्षेत्र महलका उप्र के मेरठ जिला मुख्यालय से 27 किमी दूर स्थित हैं । महलका जाने के लिए प्रातः 10.00 बजे से सायं 5.00 तक मवाना बस स्टैंड से बसें मिलती हैं ।

इसके अलावा दिल्ली, मुज्जफरनगर, सहारनपुर रेल लाइन पर सकौती टांडा रेलवे स्टेशन पड़ता हैं। इस रेलवे स्टेशन से महलका मंदिर 9 किमी दूर पड़ता हैं, यहां से घोड़े तांगे, जीप व बस द्वारा भी पहुंचा जा सकता  हैं। ग्राम महलका राष्ट्रीय राजमार्ग 58 पर दिल्ली हरिद्वार मार्ग पर सकौती से 6 किमी दूर स्थित हैं। दिल्ली से महलका की दूरी 90 किमी हैं ।

*ठहरने की व्यवस्था* - इस क्षेत्र पर रुकने की व्यवस्था उपलब्ध हैं,व भोजनालय बना हुआ है ।

*समीपवर्ती जैन तीर्थ* - बरनावा जैन मंदिर से 38 किमी,
बड़ागांव (बागपत) से 81 किमी,
वहलना जैन मंदिर से 40 किमी,
व हस्तिनापुर मंदिर से 30 किमी की दूरी पर स्थित हैं ।

*संपर्क सूत्र* 01237-285550

शहर की भीड़ भाड़ से
दूर स्थित इस अद्भुत अतिशय क्षेत्र के दर्शन कर पुण्य लाभ अवश्य लेवे !

संकलनकर्ता
सुलभ जैन (बाह)
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*महत्वपूर्ण संदेश* हम सब की धरोहर जैन तीर्थों पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखे व स्वच्छ तीर्थ बनाये रखने में सहयोग दे । ☘

Wednesday, 5 October 2016

                   कपटी बलि को सताया था डर ।
  ७०० मुनियों पर कराया उपसर्ग ।
  तीनो लोक में मचा हाहाकार ।
  युक्ति लगाकर बचाये सबके प्राण ।
         बताओ इनका नाम ।।
    तीन तीर्थकर की है ये जन्मभूमि ।
खड़गासन प्रतिमाये बनी है महान ।
बाणगंगा के तट पर बसा ।
ज्ञानमती माता की कृतियां महान ।।
           राज्य में मृतयदंड देने का था काम ।
दूर दूर तक इनका था नाम ।
केवल किया एक व्रत का पालन
भव भव से छूटे इनके प्राण ।
   मेरु सुदर्शन से बने रहे अचल 
रानी ने इनसे किया था छल
मोक्ष पाकर पाया केवल ज्ञान
पटना शहर में बना सिद्धिधाम
   पंचम काल में जन्म लिया था ।
मानव जीवन सफल किया था
मथुरा जी से मोक्ष को पाये
नाम बताने आओ सारे ।।
   उसी भव् में था मैं राजकुमार ।
प्राप्त की थी काजल की चाल
बचने किया नवकार मंत्र को सिध्द
पार किया भव भव का जाल ।